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वैशाख अमावस्या की कथा और वैशाख अमावस्या क्यों मानते है

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हेलो दोस्तों स्वागत है आपका अपनी वेबसाइट Hindi Top पर । दोस्तों आज हम जानते है वैशाख अमावस्या कि पुजा विधी क्या है? और वैशाख अमावस्या की कथा

वैशाख हिंदू वर्ष का दूसरा महीना माना जाता है। कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या कहा जाता है और इसके दूसरे दिन से शुक्ल पक्ष शुरू होता है, इस दिन को धर्म-कर्म, स्नान-दान, तर्पण आदि के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

वैशाख मास में पड़ने वाली अमावस्या को वैशाख अमावस्या कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसी महीने से त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी, जिससे वैशाख अमावस्या का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

वैशाख अमावस्या कि पुजा विधी

वैशाख अमावस्या के दिन पूरे विधि-विधान से पूजा पाठ किया जाता है। ध्यान रहे कि वैशाख अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में ही उठना चाहिए।  फिर नित्य कर्म से निवृत्त होकर पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान करें। गंगा, यमुना आदि नदियों में स्नान का महत्व बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है।

स्नान के बाद सबसे पहले भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर बहते जल में तिल डालकर स्मरण के साथ पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं। चूंकि इस विशेष दिन पर कुछ क्षेत्रों में शनि जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए तेल, तिल और दीपक आदि जलाकर शनि देव की पूजा करना अच्छा माना जाता है। कोशिश करें कि आप भी शनि चालीसा का पाठ करें और शनि मंत्रों का जाप करना न भूलें। स्मरण के साथ अपनी क्षमता के अनुसार दान और दक्षिणा का दान करें।

वैशाख अमावस्या की कथा

एक ज़माने में। एक ब्राह्मण था जिसका नाम धर्मवर्ण था। वे बहुत ही धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे। वह ऋषियों के प्रति बहुत सम्मान रखते थे और उनसे ज्ञान प्राप्त करते थे और साथ ही उपवास भी करते थे।

एक बार उन्होंने एक महात्मा के मुख से सुना कि इस कलियुग में भगवान विष्णु का नाम स्मरण करने से जो पुण्य प्राप्त होता है और किसी अन्य कार्य से नहीं मिलता।

अन्य युगों में पुण्य यज्ञ करने से जो पुण्य मिलता है, उससे भी अधिक फल इस भयानक कलियुग में भगवान के नामजप से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

संन्यासियों का यह वचन ही धर्मवर्ण के मन में धारण कर गया और वह इस संसार से अनासक्त हो गया और उसने सन्यास ले लिया। धर्मवर्ण ने सन्यास लेने के बाद इधर-उधर की यात्रा शुरू की।

एक दिन घूमते-घूमते वह पितृलोक पहुंचे। जहां धर्मवर्ण ने देखा कि उनके पूर्वज बहुत संकट में थे। धर्मवर्ण ने अपने पूर्वजों से पूछा कि वह इतनी परेशानी में क्यों हैं, तो पूर्वजों ने धर्मवर्ण को बताया कि, धर्मवर्ण के कारण ही उनकी स्थिति ऐसी है।

तब धर्मवर्ण ने अपने पूर्वजों से पूछा कि उसने क्या किया?  जिससे वह काफी परेशानी में हैं। तब पूर्वजों ने धर्मवर्ण को बताया कि वह इस संसार से सन्यास ले चुका है, जिसके कारण उसका पिंड दान करने वाला कोई नहीं बचा। जिसकी वजह से वे इतना कष्ट सहने के लिए पढ़ रहे हैं

धर्मवर्ण ने कहा कि मैं ऐसा क्या करूं कि तुम्हारे कष्टों का निवारण हो सके। पूर्वजों ने कहा कि यदि आप वापस जाकर तपस्वी जीवन को छोड़कर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करते हैं और संतान पैदा करते हैं, तो हमें कष्टों से मुक्ति मिलेगी और इतना ही नहीं वैशाख अमावस्या के दिन पूरे अनुष्ठान के साथ पिंडदान करना याद रखें।

तब धर्मवर्ण ने अपने पूर्वजों से वादा किया कि वह अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए उनकी अपेक्षाओं को अवश्य पूरा करेंगे और धर्मवर्ण अपने सांसारिक जीवन में लौट आए और वैशाख अमावस्या के दिन उन्होंने पूरे अनुष्ठान के साथ पिंड का दान किया और अपने पूर्वजों को मुक्त कराया। प्राप्त हुआ।

वैशाख अमावस्या पर क्या करें

  • पितरों की मुक्ति के लिए वैशाख अमावस्या का व्रत करें।
  • वैशाख अमावस्या के दिन किसी नदी, जलाशय या कुंड में पवित्र स्नान करना चाहिए।
  • वैशाख अमावस्या को स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और तिल को जल में प्रवाहित करें।
  • पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन तर्पण और व्रत करें और किसी गरीब को दान और दक्षिणा भी दें।
  • वैशाख अमावस्या को शनि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।  ऐसे में इस दिन शनिदेव की पूजा करनी चाहिए।
  • इस दिन शनि देव को खुश करने के लिए तिल का तेल सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए |
  • इस दिन किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं। वस्त्र और अन्न का भी दान करें।

वैशाख अमावस्या के दिन भूलकर भी ये काम नहीं करना चाहिए

  • किसी भी व्यक्ति को वैशाखा आमावस्या  के दिन देर तक नहीं सोना चाहिए।
  • इस दिन मास, शराब सहित तामसिक चीजों का प्रयोग न करें।
  • इस दिन वाद-विवाद नहीं करना चाहिए।
  • बड़ों का अपमान न करें।
  • गुस्सा नही करना चाहिए।

निष्कर्ष

हेलो दोस्तों हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा वैशाख अमावस्या की कथा और वैशाख अमावस्या क्यों मानते है के बारे में बताया जो जानकारी दिया जा रहा है वह आपको सही लग रहा होगा अगर आपको यह लेख सही लग रहा है तो आप हमारे इस लेख को सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं इस लेख में हमारे साथ शुरू से अंत तक बने रहने के लिए धन्यवाद।


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Arti Jha

मेरा नाम आरती झा है । मै बिहार मुजफ्फरपुर की रहने वाली हूं।मैं पेशे से से एक हिंदी लेखक हुँ ।

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