सिलाई मशीन का अविष्कार किसने किया | Silai Machine ka Avishkar kisne kiya

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हाथ सिलाई एक प्राचीन कला है जिससे हम कई प्रकार के कपडे हाथों से सिलकर पहना करते थे। यह कला 20000 साल पुरानी है , उस समय सिलाई किया जाता था जानवरो के हड्डियों और सींग से सुइयां बनाई जाती थी। इसी प्रकार धीरे धीरे लकड़ी की सुइयां बानी और इसी प्रकार हाथ सिलाई में भी काफी तरक्की हुई। 19 वि सदी में पेडल मशीन का अविष्कार और फिर आधुनिक काल में कम्प्युटेरिसेड सिस्टम का निर्माण हुआ। आज हम कई प्रकार के वस्त्र धारण करते है और इसका पूरा श्रेय जाता है सिलाई मशीन पर योगदान करने वाले हमारे वैज्ञानिको को जिनके योगदान से न ही सिलाई में विविधता आई बल्कि काफी लोगो को इससे रोज़गार मिला ख़ास तौर पर महिलाओ को। तो हम आज बात करने वाले है सिलाई मशीन का अविष्कार किसने किया

सिलाई मशीन का इतिहास

साल 1755 में ए वाइसेंथोल ने सबसे पहली सिलाई मशीन का अविष्कार किया। इस मशीन में सुई और धागे की कला को निखारा गया था । उसके बाद इस मशीन से प्रेरित होकर थॉमस सेण्ट ने दूसरी मशीन बनवाई, यह मॉडल हैंड क्रैंक सिस्टम पर आधारित थी । इसमें नौकिली सुई द्वारा कपडे में नीचे की और धागा कपडे की और ले जाता जो नीचे दिए गए हुक पर निर्भर है। जैसे ही सुई अपने नौक से कपडे में छेद करता ,दूसरी और धागा भरी चरखी धागा को छेद कर ऊपर लेकर आती और एक कांटेदार सुई इस धागे को कपडे के नीचे फंदा बनाकर हुक में फसा जाती , इसी प्रकार कपडा आगे सरकता रहता , और दूसरा फंदा जाकर पहले में फस जाता। जैसे ही एक गाँठ का आकर बनता है नीचे लगा हुक पहले फंदा को छोड़ दूसरे को पकड़ लेता। इसी तरह सीधे चैन की तरह कपडा सिया जाता। सिलाई मशीन अविष्कार में एक कमी थी जिसमे वैसेन्थॉल ने नोकीली सुई में छेद करने का विचार नहीं किया।

साल 1790 में थॉमस सेंट ने हैंड क्रैंक वाली मशीन डिज़ाइन की ,यह मशीन का उपयोग कैनवास बनाने के लिए किया जाता था। सिलाई मशीन का अविष्कार फ्रांस में हुआ और इसे लकड़ी से बनाई गई थी।

सिलाई मशीन का अविष्कार किसने किया | Silai Machine ka Avishkar kisne kiya

सिलाई मशीन के कई प्रकरण बने और इसका श्रेय सिर्फ एक वैज्ञानिक को दिया नहीं जा सकता। 5 व्यक्तियों ने सिलाई मशीन के जन्म में सबसे ज्यादा योगदान दिया और यह है – वॉटर हंट, अलायस होवे, जोसफ मादास्पगर , बिरथलेमी थीमोनियर और एलन बी विलसन।

इन पांचो वैज्ञानिकों ने इस मशीन को काफी अलग अलग तरह से डिज़ाइन किया है और इन्ही से प्रेरित होकर नए नए सिलाई मशीन का अविष्कार हुआ।

जोसफ मदरस्पर्गर ने सिलाई मशीन का अविष्कार कब किया

जोसफ मदरस्पर्गर ने सिलाई मशीन का अविष्कार इन्होने साल 1814 में किया और इस अद्भुद्ध अविष्कार के लिए इन्हे पुरस्कार से नवाज़ा गया। जोसफ ने साल 1841 में बुनाई करने वाली मशीन का भी निर्माण किया।

बार्थलमी थीमोनियर ने सिलाई मशीन का अविष्कार कब किया

बार्थलमी थीमोनियर ने साल 1829 में सिलाई मशीन का अविष्कार किया और साल 1830 में अपना पेटेंट फ्रांस सरकार को जारी करने के लिए प्रस्तुत किया। बड़े पैमाने में इन्होने कपडे बनाने वाली कंपनी खोली और कई लोगो के लिए रोज़गार बनीं। लेकिन सिर्फ सेना की वर्दी बनाने का कार्य करने के वजह से कुछ रोज़गार वर्ग लोग काफी आक्रोश हुए और कंपनी को आग लगा दी।

वालटर हंट

वालटर हंट प्रसिद्ध मैकेनिक वालटर हंट का जन्म 29 जुलाई , 1796 में नीव यॉर्क शहर में हुआ। इन्होने काफी छोटे से बड़े यंत्रों का निर्माण किया है जो हमारे रोज़ भरी दिनचर्या को आसान कर देती है – जैसे स्पिनर, चाकू , शार्पनर , स्वीपिंग मशीन । इनका अद्भुद अविष्कार था लोकस्टिच सिलाई मशीन जो काफी पॉपुलर हुई।

अलायस होवे

अलायस होवे का जन्म हुआ 9 जुलाई साल 1819 में शहर मैसाच्युसेट्स में हुआ था। उसी शहर से उन्होंने टेक्सटाइल कंपनी की भी शुरुवात की थी। छोटे वय से ही अलायस को मशीन की रिपेयरिंग और अविष्कारों में काफी तेजस्बी थी, बस इसी प्रकार मशीन की शोध इन्होने की। साल 1845 में, अलायस ने अपनी पहले अविष्कार मशीन का पेटेंट करवा लिया। इस मशीन को बनाने में कई वैज्ञानिक लगे हुए थे, लेकिन अलायस ही इस आटोमेटिक मशीन के पहले निर्माता बने। सुई में बनी छेद, लॉक चैन सिलाई के लिए कपडे के नीचे शटल बनवाया गया था और आटोमेटिक फीड इस मशीन की खासियत है – इस मशीन को सबसे पहले ब्रिटैन नामक शहर में अलायस के भाई ने लगभग 250 पोंड में उनके मशीन को बेचा। अलायस होवे के इस योगदान के लिए उन्हें साल 1846 में यूनाइटेड स्टेट पेटेंट से सम्मानित किया गया।

एलन बी विलसन ने सिलाई मशीन का अविष्कार कब किया

एलन बी विलसन – साल 1851 में विलसन ने रोटरी सिलाई मशीन का निर्माण किया , इस मॉडल में इन्होने रोटरी हुक का उपर्युक्त ढांचा तैयार किया।

भारत में कब सिलाई मशीन का निवेश हुआ

जिस तरह खेती हमारे भारत का प्रमुख व्यवसाय है उसी तरह सिलाई भी हमारे देश का प्रमुख पेशा है। भारत में सिलाई मशीन की शुरुवात हुई साल 1935 में । कोलकत्ता के शहर में उषा नाम की मशीन का अध्ययन पुरे देश में हो गया। आज के दौर में भी उषा ब्रांड पहले नंबर पर है और हर घर में यह नाम काफी प्रसिद्ध है।

सिलाई मशीन के कितने प्रकार है ?

सिलाई मशीन तीन प्रकार के है – यांत्रिक सिलाई मशीन, इलेक्ट्रॉनिक सिलाई मशीन और कम्पूटराइस्ड सिलाई मशीन

यांत्रिक सिलाई मशीन

यांत्रिक सिलाई मशीन एक सरल और आसान चलने वाली मशीन है, इस यन्त्र में खर्च तो काफी कम है लेकिन सिलने में काफी समय लग जाता है। यांत्रिक सिलाई मशीन दो प्रकार के है – हाथ से चलने वाली मशीन और पेडल सिलाई मशीन हाथ से चलने वाली मशीन- यह मशीन घर में चलने के लिए काफी उपर्युक्त है , इसमें मशीन के चकके से एक हैंडल लगा हुआ है, जिसे घूमने पर सिलाई होती है।

पेडल सिलाई मशीन

इस मशीन में छक्के की और बेल्ट लगा हुआ होता है, इसमें हाथ चलाना नहीं पड़ता। इसमें नीचे की तरफ पेडल लगा होता है जिसे आपको पैर से चलाना पड़ता है , बेल्ट के घूमने से सिलाई लगती है। इस मशीन में न तो हाथों की और न ही बिजली की जरुरत लगती है। यह 19वि सदी तक बड़े बड़े कंपनियों में चलती थी, अब आधुनिक काल में कई घरों में आज भी इसका इस्तेमाल होता है।

इलेक्ट्रॉनिक सिलाई मशीन

साल 1970 शतक में इलेक्ट्रॉनिक मशीन काफी चर्चित हुई। इस मशीन में मोटर के इस्तेमाल से मशीन का नियंत्रण होता है। इस मशीन में पेरो की जगह इलेक्ट्रॉनिक मोटर लगती है , जो बिजली से चलती है। इसमें आधुनिक सुविधाए है जिससे सिलाई की गति काफी अधिक होती है और आप इसमें कई तरह के कपडे सिला सकते है।

कम्पूटराइज़्ड सिलाई मशीन

20 वि सदी में इस मशीन का डिज़ाइन काफी अलग है। यह मशीन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के आधार पर चलती है। कंप्यूटर में काफी तरह के डिज़ाइन फीड किया जाता है जिससे सॉफ्टवेयर के जरिये मशीन में सारक्षित किया जाता है। इस मशीन में आप कई प्रकार के एम्ब्रायडरी कपडे, लेसेस, जैक्वार्ड कपडे तैयार कर सकते है।

आप ने क्या सिखा

आप ने सिखा सिलाई मशीन का अविष्कार किसने किया और सिलाई मशीन की सभी जानकारी आप को दी अब आप कोई प्रश्न हो तो हम को Comment कर के पूछ सकते है

हमारे साथ इस आर्टिकल में अंत तक बने रहने के लिए धन्यवाद्। आशा करते हे आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो।


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